स्वर्गीय अधिवक्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट राजेश सूरी से संबंधित नगर निगम में सैलरी से संबंधित एवं नगर निगम के अधिवक्ता नियुक्ति से संबंधित सारी फाइलों के गायब व चोरी से संबंधित प्रकरण

News Desk
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त्तराखण्ड सूचना आयोग का कड़ा निर्णय: आरटीआई में भ्रामक जानकारी देने और सूचना छिपाने पर तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी पर ₹10,000/- का जुर्माना।

​देहरादून, उत्तराखण्ड: उत्तराखण्ड सूचना आयोग ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (RTI Act) के प्रावधानों की अवहेलना करने और जनता को समय पर सही सूचना उपलब्ध न कराने के मामलों में एक कड़ा संदेश दिया है। राज्य सूचना आयुक्त श्री दलीप सिंह कुँवर की अदालत द्वारा शिकायत संख्या 16838 में एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया गया है।

​प्रकरण का मुख्य विवरण:
​शिकायतकर्ता: श्री राज कुमार सूरी
​प्रत्युत्तरदाता: श्री तनवीर सिंह मारवाह, तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी / उप नगर आयुक्त, नगर निगम, देहरादून एवं श्री धर्मेश पैन्यूली, कर अधीक्षक (भूमि)।

​मामला: शिकायतकर्ता श्री राज कुमार सूरी द्वारा दिनांक 14.02.2026 को नगर निगम, देहरादून से भूमि से संबंधित अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियों हेतु 6 बिंदुओं पर आरटीआई आवेदन प्रस्तुत किया गया था।

​आयोग की मुख्य टिप्पणियां एवं निर्णय:
​भ्रामक और गैर-जिम्मेदार जवाब: तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी द्वारा बिना किसी उचित अभिलेखीय सत्यापन के यह कहकर पल्ला झाड़ लिया गया कि माँगी गई सूचना “कार्यालय में धारित नहीं है”, जबकि बाद में आयोग की बैठकों और निर्देशों के क्रम में वही पत्रावली कार्यालय में उपलब्ध पाई गई।

​कानून का उल्लंघन: आयोग ने इसे लोक सूचना अधिकारी के वैधानिक दायित्वों में गंभीर लापरवाही और जानबूझकर सूचना छिपाए जाने का प्रथम दृष्टया दोषी पाया।

शाസ്റ്റി (जुर्माना) अधिरोपित: सुनवाई के दौरान तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी / उप नगर आयुक्त श्री तनवीर सिंह मारवाह द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण को असंतोषजनक पाते हुए, आयोग ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 20(1) के अंतर्गत ₹10,000/- (दस हजार रुपये मात्र) की शास्ति (जुर्माना) अधिरोपित की है। यह धनराशि नियमानुसार दो माह के भीतर दो समान किस्तों में राजकोष में जमा करानी होगी।

​भविष्य के लिए सख्त चेतावनी: आयोग ने नगर निगम, देहरादून के प्राधिकारी/नगर आयुक्त को भी निर्देशित किया है कि भविष्य में प्रत्येक आरटीआई आवेदन का निस्तारण पूरी जिम्मेदारी और समय-सीमा के भीतर सुनिश्चित किया जाए, ताकि इस प्रकार की पुनरावृत्ति न हो।
​यह आदेश आरटीआई अधिनियम के तहत पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने की दिशा में एक कड़ा और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

उपाध्यक्ष एवं ट्रस्टी एवं मीडिया प्रभारी आरटीआई क्लब उत्तराखंड सुश्री रीता सूरी बहन अधिवक्ता शाहिद राजेश सूरी

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