गाजियाबाद। गाजियाबाद जिले के सबसे व्यस्त सड़कों में शामिल ज्ञानी बॉर्डर से लाल कुआं तक जीटी रोड को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को सौंपने की वर्षों पुरानी कवायद पर विराम लग गया है।
पीडब्ल्यूडी का दावा है कि एनएचएआई ने नियमों का हवाला देते हुए इस मार्ग का हैंडओवर लेने से इनकार कर दिया है। हैंडओवर लेने के बाद इस सड़क के चौड़ीकरण, आधुनिकीकरण और इस पर एलिवेटेड बनाने की योजना थी।
अब इस सड़क का रखरखाव और मरम्मत पहले की तरह लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के जिम्मे रहेगा। हालांकि, वर्तमान सांसद अभी भी इसे हैंडओवर के लिए प्रयासरत हैं।
यह सड़क गाजियाबाद की जीवनरेखा
दिल्ली-उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाली यह सड़क गाजियाबाद की जीवनरेखा मानी जाती है। पूर्व सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह ने अपने कार्यकाल में इस सड़क को एनएचएआई को हैंडओवर कराने की पहल की थी। उनका तर्क था कि पीडब्ल्यूडी के सीमित संसाधनों की तुलना में एनएचएआई इस मार्ग का बेहतर विकास कर सकेगा।
इसके बाद विभागीय स्तर पर कई दौर की पत्राचार और बैठकों का सिलसिला चला। वर्तमान सांसद अतुल गर्ग ने भी इस मामले को आगे बढ़ाया। उन्होंने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से कई बार मुलाकात कर सड़क को एनएचएआई को हैंडओवर करने के लिए बातचीत की।
इसके बावजूद अब एनएचएआई ने इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही हैंडओवर की फाइल भी बंद कर दी गई है। पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता रामराजा ने बताया कि जीटी रोड के हैंडओवर की कागजी प्रक्रिया बंद हो गई है।
इसलिए नहीं लिया हैंडओवर
एनएचएआई का मानना है कि यह सड़क उसके मौजूदा राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का हिस्सा नहीं है। इसके अतिरिक्त मार्ग अत्यधिक शहरी क्षेत्र से होकर गुजरता है, जहां दोनों ओर घनी आबादी, व्यावसायिक प्रतिष्ठान, सर्विस लेन, बिजली-पानी की लाइनें और अन्य सरकारी ढांचे मौजूद हैं। भविष्य में चौड़ीकरण या बड़े निर्माण कार्यों के लिए बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण और अतिक्रमण हटाने की जरूरत पड़ेगी।
इसके अलावा इस सड़क पर नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, जल निगम, विद्युत विभाग और यातायात पुलिस समेत कई एजेंसियों का समन्वय आवश्यक है। ऐसे में एनएचएआइ ने इसे अपने अधीन लेने में रुचि नहीं दिखाई।
हैंडओवर होता तो क्या बदलता
यदि सड़क एनएचएआइ को मिल जाती तो इसका व्यापक कायाकल्प किया जाता। अधिकारियों के अनुसार सड़क की पूरी री-डिजाइनिंग होती। क्षतिग्रस्त हिस्सों का पुनर्निर्माण, बेहतर ड्रेनेज सिस्टम, आधुनिक स्ट्रीट लाइट, सर्विस रोड का विकास, फुटपाथ, हरित पट्टी, सुरक्षित यू-टर्न, नई रेलिंग, साइनेज और सड़क सुरक्षा से जुड़े अन्य कार्य किए जाते। जहां आवश्यकता होती वहां जाम कम करने के लिए फ्लाइओवर, अंडरपास या अन्य इंजीनियरिंग समाधान भी तैयार किए जा सकते थे। सड़क की नियमित मशीन आधारित मरम्मत और निगरानी भी एनएचएआइ के मानकों के अनुसार होती।
लाखाें लाेगों को मिली मायूसी
गाजियाबाद में ज्ञानी बार्डर से लाल कुआं तक जीटी रोड की लंबाई लगभग लगभग 18 किलोमीटर मानी जाती है। इस हिस्से को पीडब्ल्यूडी से लेकर एनएचएआइ को सौंपने का प्रस्ताव था। यह मार्ग दिल्ली सीमा, साहिबाबाद, मोहननगर, राजेंद्र नगर, हिंडन क्षेत्र, पुराना बस अड्डा, घंटाघर और लाल कुआं जैसे प्रमुख क्षेत्रों को जोड़ता है।
जानकारों के अनुमान के अनुसार इस मार्ग से प्रतिदिन डेढ़ से दो लाख से अधिक वाहन गुजरते हैं। इनमें निजी वाहन, बसें, ट्रक, स्कूल वाहन और मालवाहक वाहन शामिल हैं। यदि यात्रियों की संख्या के आधार पर देखा जाए तो प्रतिदिन चार से पांच लाख लोग इस मार्ग का उपयोग करते हैं।

