नई दिल्ली- दिल्ली की एक अदालत ने उपहार सिनेमा अग्निकांड के दोषी और रियल एस्टेट कारोबारी सुशील अंसल के खिलाफ पासपोर्ट नवीनीकरण के दौरान गलत जानकारी देने के मामले में कार्रवाई आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है। यह प्रकरण उनकी मूल सजा से अलग है और पासपोर्ट आवेदन में आपराधिक मामलों को छिपाने से जुड़ा है।
पटियाला हाउस कोर्ट की मुख्य महानगर दंडाधिकारी श्रिया अग्रवाल ने 28 नवंबर को पारित आदेश में कहा कि उपलब्ध साक्ष्य प्रथम दृष्टया आरोप तय करने के लिए पर्याप्त हैं। अदालत ने संकेत दिया कि अंसल पर धोखाधड़ी (IPC 420), झूठी सूचना देने (IPC 177), शपथ पर झूठा बयान देने (IPC 181) और पासपोर्ट अधिनियम की धारा 12 के तहत मुकदमा चलाया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 13 जनवरी 2026 के लिए निर्धारित की गई है।
पासपोर्ट आवेदन में गंभीर जानकारियाँ छिपाने के आरोप
जांच में यह सामने आया कि अंसल ने 2013 में तत्काल पासपोर्ट के लिए आवेदन करते समय शपथ-पत्र में अपनी सजा और लंबित पुलिस मामलों का कोई उल्लेख नहीं किया। अदालत के अनुसार, यह जानकारी जानबूझकर छिपाई गई ताकि क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय को गुमराह करके दस्तावेज हासिल किया जा सके। इसके साथ ही उन्होंने अपने पुराने पते का सही विवरण भी नहीं दिया, जिससे उनकी आपराधिक पृष्ठभूमि का पता न चल पाए।
कोर्ट ने आदेश में यह भी दर्ज किया कि अंसल की ओर से बाद में “गलती से ऐसा हो गया” कहकर दी गई सफाई स्वीकार नहीं की जा सकती, क्योंकि वह पासपोर्ट एक वैधानिक दस्तावेज है और इसके लिए सही और पूर्ण जानकारी देना अनिवार्य होता है।
बचाव पक्ष की दलील कोर्ट ने खारिज की
अंसल के वकीलों ने तर्क दिया था कि लिखित शिकायत न होने के कारण केस आगे नहीं बढ़ाया जा सकता। अदालत ने इसे अस्वीकार करते हुए कहा कि यह कार्रवाई दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद शुरू की गई थी, जिसे कानून के तहत किसी सक्षम वरिष्ठ अधिकारी द्वारा दिए गए निर्देश के समान माना जाएगा।

