DLF मॉल के पास ₹2000 का खेल, पार्किंग से उठा ले गए इंफ्लूएंसर की कार, जमकर कटा बवाल

News Desk
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नोएडा: दिल्ली से सटे नोएडा के सेक्टर-18 स्थित डीएलएफ मॉल ऑफ इंडिया के बाहर जबरन वसूली और संगठित पार्किंग रैकेट का गंभीर आरोप सामने आया है। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर प्राची मोंगा ने एक वीडियो जारी कर दावा किया है कि नोएडा अथॉरिटी और स्थानीय पुलिस की नाक के नीचे यह अवैध कारोबार चल रहा है। इस वीडियो के वायरल होने के बाद मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, इसकी पुष्टि के लिए अधिकारियों की ओर से अभी कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है।प्राची मोंगा जब डीएलएफ मॉल ऑफ इंडिया पहुंचीं, तो मॉल के भीतर पार्किंग पहले ही भर चुकी थी। नोएडा में नई होने के कारण उन्हें स्थानीय रास्तों और पार्किंग नियमों की सटीक जानकारी नहीं थी। मॉल के बाहर सड़क किनारे कई वाहन पहले से खड़े थे, लेकिन वहां नो-पार्किंग जोन या चेतावनी देने वाला कोई बोर्ड नहीं दिख रहा था। इस उलझन में प्राची ने वहां मौजूद एक व्यक्ति से पूछा कि क्या वे अपनी गाड़ी वहां रख सकती हैं। जवाब में उस शख्स ने लापरवाही भरे अंदाज में कहा कि जब वहां पहले से 100 से अधिक गाड़ियां खड़ी हैं, तो एक और गाड़ी खड़ी होने से कोई अंतर नहीं पड़ेगा।

उस व्यक्ति की बात पर भरोसा करते हुए प्राची ने अपनी कार वहीं खड़ी कर दी और मॉल के अंदर अपना काम निपटाने चली गईं। उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि वह शख्स उसी समूह का हिस्सा हो सकता है, जो वहां आने वाले ड्राइवरों को फंसाने के लिए तैयार बैठा था। जब प्राची अपना काम पूरा करके बाहर आईं, तो उनकी कार वहां से मौजूद नहीं थी। सड़क किनारे खड़ी अन्य गाड़ियां भी गायब थीं। पहली नजर में उन्हें लगा कि उनकी कार चोरी हो गई है, जिससे वे बेहद परेशान और घबरा गईं।

2000 हजार रुपये मांगे

हालांकि, कुछ ही समय बाद वहां मौजूद एक व्यक्ति ने प्राची को बताया कि उनकी कार चोरी नहीं हुई है। उसके मुताबिक, एक संगठित गिरोह ने गाड़ी को टो करके नजदीक के एक बेसमेंट में रख दिया था। जब प्राची कार वापस लेने के लिए वहां पहुंचीं, तो उनसे गाड़ी छोड़ने के लिए 2,000 रुपये की मांग की। इस घटना से नाराज प्राची मोंगा ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा कर सवाल उठाया कि नोएडा अथॉरिटी और पुलिस की निगरानी के बीच यह जबरन वसूली का कारोबार कौन चला रहा है।

लगाए गंभीर आरोप

प्राची मोंगा ने दावा किया कि यह मामला सामान्य ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर चालान काटने जैसा नहीं है, बल्कि पहले से तैयार योजना के तहत चल रहे संगठित पार्किंग रैकेट का मामला है। उनके अनुसार, बिना नो-पार्किंग बोर्ड लगाना, लोगों को वहां गाड़ी रखने के लिए प्रोत्साहित करना और फिर गाड़ी हटाकर पैसे की मांग करना सीधे आम नागरिकों से वसूली का तरीका बन गया है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसने नोएडा के इस प्रतिष्ठित इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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