
नोएडा। सेक्टर 120 स्थित आरजी रेजीडेंसी में मेंटेनेंस डिफॉल्टर की बिजली कटने पर विद्युत निगम दखल नहीं दे सकेगा।
इलाहबाद हाई कोर्ट ने सोसायटी में डिफॉल्टर के यहां पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (पीवीवीएनएल) की ओर से जारी हुए निर्बाध बिजली आपूर्ति के नोटिस पर भी रोक लगाई है।
अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (एओए) की ओर से न्यायालय में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया।
मेंटेनेंस वसूली पर कोर्ट का फैसला
यह मामला सोसायटियों में बिजली और मेंटेनेंस की वसूली से जुड़ा है। आरजी रेजीडेंसी एओए के अधिवक्ता अजय गुप्ता और ऋषिकांत राय ने अदालत में मजबूती से पक्ष रखते हुए साफ किया कि सोसायटी में पीवीवीएनएल का सिंगल प्वॉइंट बिजली कनेक्शन लागू है।
फ्लैटों में लगे मीटर कोई स्वतंत्र प्रीपेड मीटर नहीं बल्कि सिर्फ डिस्प्ले यूनिट हैं। साॅफ्टवेयर से ये संचालित होते हैं। रीचार्ज करने पर यह खुद से काॅमन एरिया मेंटेनेंस (सीएएम) और अन्य शुल्कों की कटौती करता है और उसके बाद ही बिजली के पैसे समायोजित होते हैं।
सिंगल प्वॉइंट कनेक्शन पर बहस
पीवीवीएनएल अपने कमर्शियल फायदे के लिए सोसायटियों को मल्टी प्वॉइंट कनेक्शन देना चाहता है। इससे लोग बिजली बिल तो भरेंगे, लेकिन मेंटेनेंस शुल्क नहीं देंगे। हाई कोर्ट ने विद्युत निगम और राज्य सरकार से सवाल किया।
अगर मेंटेनेंस की वसूली रोक दी जाएगी तो रखरखाव पर चलने वाली सोसायटी की सुविधाएं प्रभावित होंगी। कोर्ट ने पीवीवीएनएल के नोटिस को निरस्त कर एओए के पक्ष में फैसला सुनाया।
आरजी रेजीडेंसी के पूर्व सचिव अविनाश अरुण ने बताया कि यह एओए की बड़ी जीत है। सोसायटी में बड़ी संख्या में मेंटेनेंस डिफॉल्टर हैं और बिजली का उपयोग कर रहे हैं।
38 सोसायटियों में सिंगल प्वॉइंट की व्यवस्था
नोएडा की 38 सोसायटियों में अभी भी सिंगल प्वॉइंट बिजली आपूर्ति की व्यवस्था है। निगम ने बिल्डर और एओए के नाम कनेक्शन दिया है। फ्लैटों में बिल्डर और एओए खुद के साफ्टवेयर से संचालित प्रीपेड मीटर से बिजली आपूर्ति कर रहे हैं।
