
नई दिल्ली। ऑनलाइन बिजनेस में भारी मुनाफे का झांसा देकर साइबर अपराधियों द्वारा पश्चिमी दिल्ली के एक व्यक्ति से 82.5 लाख रुपये ठगी करने का मामला सामने आया है। डेटिंग एप के जरिये पीड़ित की पिछले साल एक महिला से दोस्ती हुई थी।
उसने खुद को सिंगापुर की रहने वाली और बेंगलुरु में एक मल्टी नेशनल कंपनी में काम करने की बात बताई थी। धीरे-धीरे महिला साइबर अपराधी, पीड़ित को अपने जाल में फंसाती चली गई जिससे दोस्ती और बिजनेस में मोटा मुनाफा कमाने के लालच में वह ठगी के शिकार बन गए।
पुलिस को दी शिकायत में पीड़ित राम सिंह ने बताया कि पिछले साल वह डेटिंग एप के जरिये एक महिला के संपर्क में आए, जिसने अपना नाम लूना बताया था। उसने दावा किया कि वह सिंगापुर की नागरिक है और बेंगलुरु में बड़ी कंपनी में नौकरी करती है।
कई महीने तक बात करने के बाद उनका भरोसा जीतने के बाद महिला ने बताया कि वह एक मोबाइल एप के ज़रिए आनलाइन स्टोर चलाकर अच्छा-खासा मुनाफ़ा कमा रही है और उन्हें भी ऐसा ही बिज़नेस शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
बिजनेस करने के लिए तैयार होने पर उन्हें एक वाट्सएप ग्रुप में जोड़ लिया गया, जहां ग्रुप के सदस्यों का परिचय उनसे बिजनेस और उसके कामकाज को संभालने वाले लोगों के तौर पर कराया गया।
झांसे में आकर पीड़ित ने सबसे पहले एक अकाउंट में 10 हजार रुपये ट्रांसफर किए फिर उन्हें बड़ी रकम ट्रांसफर करने के लिए क्रिप्टोकरेंसी प्लेटफार्म का इस्तेमाल करने के लिए मनाया गया। एक बार दो लाख रुपये निकाले पर उनका भरोसा पक्का हो गया कि ऑनलाइन बिज़नेस असली है और उनके पैसे सुरक्षित हैं।
पीड़ित को बताया गया कि उनके अकाउंट क्रेडिट की वैल्यू कम हो गई है और कुछ फ़ायदों का एक्सेस वापस पाने के लिए उन्हें 25 हजार डालर (लगभग 24 लाख रुपये) जमा करने होंगे जिसपर उन्होंने पेमेंट कर दिया। कुल मिलाकर उनसे 82.5 लाख रुपये ठग लिए गए।
बाद में उन्हें बताया गया कि ग्रुप के स्टाफ़ के साथ उनके कोलैबोरेशन (मिलीभगत) का पता चल गया है और उनके पैसे निकालने पर रोक लगा दी गई है। इस समस्या को हल करने के लिए, उनसे मार्जिन डिपाज़िट के तौर पर और 35 हजार डालर (34 लाख रुपये) जमा करने को कहा गया।
जब उन्हें कुछ गड़बड़ लगी, तो उन्हें वाट्स ग्रुप से हटा दिया गया और प्रोफ़ाइल का एक्सेस ब्लॉक कर दिया गया, जिससे वह अपने पैसे नहीं निकाल पाए। तब उन्हें एहसास हुआ कि यह सोच-समझकर किया गया ठगी था।
जिसके बाद उन्होंने बीते अगस्त में पश्चिमी दिल्ली के साइबर थाने में शिकायत कर दी। बाद में इस केस को आइएफएसओ में ट्रांसफर कर दिया गया। अब तक इस मामले में पुलिस किसी को भी नहीं गिरफ्तार कर पाई है।
