ग्रेटर नोएडा। बिलासपुर स्थित फलक लाइफ लाइन हाॅस्पिटल में काम करने वाले एक डाॅक्टर ने आरोप लगाया है कि अस्पताल प्रबंधन रुपये बचाने के चक्कर में तकनीशियन से ही सिजेरियन डिलीवरी कराता था। यह खेल बीते करीब तीन वर्षों से चल रहा था।
डाॅक्टर ने बताया कि कई बार उसने हाॅस्पिटल के डायरेक्टर से तकनीशियन से सिजेरियन डिलीवरी या सामान्य डिलीवरी नहीं कराने की सलाह भी दी, लेकिन वह निरंतर काम कराते रहे। इस बीच पहले भी कई लोगों की मौत हुईं, लेकिन उन्होंने आपस में समझौता कर मामलों को रफा दफा कर दिया।
अस्पताल में खामियों का अंबार
बता दें कि बिलासपुर स्थित अस्पताल में 16 जुलाई को एक प्रसूता को भर्ती किया गया था। सिजेरियन डिलीवर में 17 जुलाई को मौत हो गई थी। प्रसूता की मौत में अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाकर स्वजन ने पुलिस और जिलाधिकारी मेधा रूपम से लिखित शिकायत की थी।
शिकायत का संज्ञान लेते हुए डीएम ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से पांच सदस्यीय टीम गठित की थी। टीम ने एक अगस्त को अस्पताल का निरीक्षण किया। इस दौरान अस्पताल में कई खामियां पाईं गईं थीं।
प्रबंधन नहीं दे पा रहा कागजात
इसमें नियमों के विपरीत आईसीयू, एनआईसीयू, ओटी, लैब संचालित हो रहीं थी। इसके अलावा फायर ब्रिगेड से एनओसी तक नहीं मिली थी। निरीक्षण करने गई टीम ने तत्काल अस्पताल को डीएम के निर्देश पर सील कर दिया था और संबंधित कागजों को पेश किए जाने के लिए कहा था। इस बीच स्वास्थ्य विभाग ने दो बार अस्पताल प्रबंधन को नोटिस भी भेजा, लेकिन अभी तक कोई कागज नहीं पेश किए गए।
तीन साल से चल रहा गड़बड़झाला
अस्पताल में काम करने वाले डाॅक्टर ने ‘दैनिक जागरण’ को बताया कि उसे सिर्फ पथरी की सर्जरी के लिए बुलाया जाता था। सामान्य डिलीवरी और सिजेरियन डिलीवरी विनोद नाम के तकनीशियन से कराई जाती थी।
आरोप लगाया कि कई बार तकनीशियन से कराने के लिए अस्पताल के डायरेक्टर से मना किया था, लेकिन वह नहीं माने और बीते करीब तीन वर्ष से तकनीशियन से ही सिजेरियन डिलीवरी करा रहे थे। 17 जुलाई को हुई मौत के मामले में पहले कोशिश की गई थी कि मामले में समझौता हो जाए, लेकिन मामला गंभीर हो गया।
आरोपों काे कहा निराधार
रुपयों के लालच में तकनीशियन से ही सिजेरियन सर्जरी करा रहे थे। इससे पहले भी कई मौतें हो चुकी हैं, उसके बाद भी उन्होंने कोई सुधार नहीं किया।
वहीं अस्पताल के डायरेक्टर तकी इमाम का कहना है कि लगाए गए आरोप निराधार हैं। वह जल्द ही स्वास्थ्य विभाग के सामने सभी कागज पेश करेंगे। सर्जन से ही सर्जरी करा रहे थे, किसी तरह की कोई लापरवाही नहीं बरती गई है।

