गाजियाबाद। राखी का पर्व भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का उत्सव है। देवपा परिवार की कहानी इस रिश्ते की उस ताकत को सामने लाती है, जो मुश्किल वक्त में हौसला बनती है और आगे बढ़ने की राह दिखाती है।
परिवार ने आर्थिक संघर्ष के दौर में एक-दूसरे का हाथ थामा और आज इसी परिवार का एक बेटा देश की सीमाओं की सुरक्षा में जुटा है, जबकि बहन ऋचा बल्लभ खुल्बै समाज के जरूरतमंद लोगों के जीवन में बदलाव लाने के लिए सक्रिय है।
आशीष देवपा का बचपन संघर्षों के बीच बीता। परिवार की आर्थिक स्थिति को संभालने में उनकी मां प्रेमा देवपा ने घर पर ही मठरी, लड्डू और अन्य घरेलू खाद्य सामग्री तैयार कर परिवार की आय में सहयोग किया।
मां की मेहनत ने बच्चों को परिस्थितियों से हार मानने के बजाय आगे बढ़ना सिखाया। आशीष की बड़ी बहनों ऋचा बल्लभ खुल्बै, चित्रा और प्रियंका ने भी उनके सपनों को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
उन्होंने स्वयं ट्यूशन पढ़ाकर आर्थिक सहयोग किया और भाई की पढ़ाई जारी रखने में मदद की। मुश्किल दौर में बहनों का साथ आशीष के लिए हौसला बना। परिवार के त्याग और आपसी सहयोग ने उनके भीतर आगे बढ़ने का जज्बा मजबूत किया।
सीमा पर निभा रहे देश सेवा का दायित्व
संघर्ष से निकले आशीष आज बीएसएफ में सेवाएं देते हुए देश की सीमाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उनके लिए देश सेवा केवल नौकरी नहीं, बल्कि कर्तव्य है। उनकी इस उपलब्धि के पीछे मां की मेहनत और बहनों के त्याग की कहानी भी जुड़ी है।
समाजसेवा को बनाया बहन ने जीवन का उद्देश्य
आशीष की बहन ऋचा बल्लभ खुल्बै समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वह शिक्षा, दिव्यांगजन सशक्तीकरण और जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए लगातार काम कर रही हैं। परिवार की एक और बहन चित्रा भी शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
