
सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा की डीएम मेधा रूपम को बड़ी राहत दी है। सवोच्च अदालत ने छात्रा की NSA हिरासत रद्द करने, डीएम मेधा रूपम की आलोचना करने के साथ ही 5 लाख रुपये के मुआवजे वाले इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है। गौतम बुद्ध नगर यानी नोएडा और ग्रेटर नोएडा की डीएम मेधा रूपम ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नोएडा में अप्रैल में हुए मजदूरों के प्रदर्शन के दौरान एक छात्रा को रासुका के तहत हिरासत में लेने के मामले में मेधा रूपम के वेतन से 5 लाख रुपये की मुआवजा राशि काटने का निर्देश दिया था।
मेधा रूपम को राहत, फैसला सुरक्षित
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने छात्रा आकृति चौधरी की NSA हिरासत रद्द करने और नोएडा और ग्रेटर नोएडा की डीएम मेधा रूपम की आलोचना करने वाले इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है। सर्वोच्च अदालत का यह आदेश नोएडा की डीएम मेधा रूपम के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) की जिला मजिस्ट्रेट मेधा रूपम की याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।
क्षतिपूर्ति देने के आदेश पर रोक
जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और एनके सिंह की बेंच ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस निर्देश पर भी आंशिक रूप से रोक लगा दी जिसमें गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) की जिला मजिस्ट्रेट मेधा रूपम से आकृति चौधरी को अपनी सैलरी से 5 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति देने के लिए कहा गया था।
हाई कोर्ट ने लगाई थी फटकार
पीटीआई-भाषा के अनुसार, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बीते 2 सितंबर को डीयू से इतिहास में स्नातक की पढ़ाई कर चुकी छात्रा आकृति चौधरी (25) की हिरासत रद्द कर दी थी। आकृति चौधरी को मजदूरों के प्रदर्शन के संबंध में रासुका के तहत हिरासत में लिया गया था। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने डीएम मेधा रूपम की ओर से पारित किए गए हिरासत आदेश के तौर-तरीकों की कड़ी आलोचना करते हुए फटकार लगाई थी कि ‘लापरवाह’ नौकरशाही का लगातार ‘मनमाना’ रवैया उत्तर प्रदेश को एक श्निरंकुश’ शासन में बदल सकता है।
सेलरी से क्षतिपूर्ति वसूलने के दिए थे आदेश
पीटीआई-भाषा के मुताबिक, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आकृति चौधरी की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि छात्रा की एनएसए हिरासत राज्य सरकार की ओर से गढ़ी गई कहानी पर आधारित थी। इसके साथ ही इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा था कि 5 लाख रुपये की मुआवजा राशि हिरासत आदेश पारित करने वाली मेधा रूपम और थाना प्रभारी तक के जिम्मेदार अन्य अधिकारियों की सेलरी से वसूल की जाए। यही नहीं यदि किसी दूसरे मामले में आकृति चौधरी की गिरफ्तारी जरूरी नहीं है तो उनको फौरन रिहा कर दिया जाए।
