
ग्रेटर नोएडा: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अजनारा होम्स सोसायटी में आठ सालों से फ्लैट्स की अटकी रजिस्ट्री से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए सख्त रुख अपनाया है। इस मामले में हाईकोर्ट ने यूपी रेरा और उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। रेरा को 30 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई में अपना जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं।
याचिकाकर्ता सचिन अग्रवाल, लवलेश शर्मा, दीपक माथुर ने बताया कि परिसर में रह रहे घर खरीदार वर्ष 2018 से फ्लैट्स की रजिस्ट्री का इंतजार कर रहे हैं। यहां पर 2200 से अधिक फ्लैट हैं। इसमें करीब 600 फ्लैट्स की रजिस्ट्री अब तक नहीं हो सकी है। आरोप है कि बिल्डर प्रबंधन ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का बकाया जमा नहीं किया है। इस वजह से दिक्कत बढ़ रही है। इस समस्या को लेकर 20 होम बायर्स ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
कोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया
इस मामले में न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की खंडपीठ ने घर खरीदारों की याचिका पर सुनवाई करते हुए सख्त रुख अपनाया। मामले में बिल्डर को ग्रेनो प्राधिकरण की बकाया राशि 31 अगस्त 2026 तक जमा करने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, निर्धारित समय-सीमा बीतने के बाद भी बिल्डर ने पैसा जमा नहीं किया।
‘खरीदारों के कानूनी अधिकार प्रभावित’
अदालत ने पाया कि फ्लैट बेचने के बाद भी संबंधित बिल्डर ने ग्रेनो प्राधिकरण को प्रीमियम, वार्षिक किराया, लीज रेट और समय-विस्तार शुल्क समेत देय राशि जमा नहीं की, जिसके कारण खरीदार अपनी लीज डीड का पंजीकरण नहीं करा पा रहे है। हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि बिल्डर की ओर से बकाया जमा नहीं करने के कारण खरीदारों के कानूनी अधिकार प्रभावित हुए है। साथ ही, लीज डीड का पंजीकरण नहीं होने से राज्य सरकार को मिलने वाली स्टाम्प ड्यूटी भी प्रभावित हुई है।
