तमिलनाडु में बड़ा राजनीतिक फेरबदल, एनडीए गठबंधन से अलग हुए पूर्व मुख्यमंत्री पन्नीरसेल्वम

Amit
2 Min Read

मुख्यमंत्री स्टालिन से मुलाकात के बाद लिया गया अहम फैसला

चेन्नई। तमिलनाडु में 2026 में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। पूर्व मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम (ओपीएस) के नेतृत्व वाली एआईएडीएमके कैडर राइट्स रिट्रीवल कमेटी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन से संबंध समाप्त करने का ऐलान कर दिया है। यह निर्णय मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन से मुलाकात के कुछ घंटे बाद सामने आया, जिससे सियासी हलचल और बढ़ गई है।

इस फैसले की घोषणा समिति के वरिष्ठ नेता और सलाहकार पनरुट्टी एस. रामचंद्रन ने गुरुवार को एक प्रेस वार्ता में की, जिसमें स्वयं ओपीएस भी उपस्थित थे। समिति ने स्पष्ट किया कि अब से वे एनडीए का हिस्सा नहीं रहेंगे। साथ ही यह भी बताया गया कि ओ. पन्नीरसेल्वम राज्यभर में दौरा करेंगे और राजनीतिक स्थिति का आकलन कर आगामी गठबंधनों पर निर्णय लेंगे।

गठबंधन टूटने के पीछे कारण:
सूत्रों के अनुसार, ओपीएस की नाराजगी की वजह हालिया घटनाक्रम है, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के लिए पत्र लिखा था, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। इसको लेकर उनकी निराशा बढ़ी और उन्होंने केंद्र सरकार पर ‘समग्र शिक्षा अभियान’ (SSA) के फंड वितरण में देरी को लेकर सोशल मीडिया पर आलोचना भी की थी। माना जा रहा है कि यह घटनाएं ही एनडीए से अलग होने का मुख्य कारण बनीं।

नए गठबंधन के संकेत:
ओपीएस ने अभिनेता विजय की पार्टी तमिलागा वेत्त्री कझगम (TVK) के साथ गठबंधन की संभावना को पूरी तरह नकारा नहीं है। उन्होंने कहा, “अभी चुनाव में समय है, वक्त आने पर स्थिति स्पष्ट होगी।” बता दें कि ओपीएस पहले एआईएडीएमके के शीर्ष नेता थे, लेकिन आंतरिक मतभेदों के चलते उन्होंने अपनी स्वतंत्र धारा बना ली थी।

राजनीतिक मायने:
एनडीए से अलग होने के फैसले ने तमिलनाडु की राजनीति में संभावित नए समीकरणों की नींव रख दी है। यह घटनाक्रम 2026 विधानसभा चुनावों से पहले राज्य की सियासी दिशा को नया मोड़ दे सकता है।

Share This Article
Leave a Comment