नई दिल्ली: दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के दौरान एक व्यक्ति की हत्या के मामले में 12 आरोपियों को बरी कर दिया है. एडिशनल सेशंस जज प्रवीण सिंह ने आरोपियों को बरी करने का आदेश दिया. कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति के खिलाफ सिर्फ इसलिए आपराधिक जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकती, क्योंकि वह गैरकानूनी भीड़ का हिस्सा था.
कोर्ट ने जिन आरोपियों को बरी करने का आदेश दिया उनमें लोकेश सोलंकी, पंकज शर्मा, अंकित चौधरी, प्रिंस, जतिन शर्मा, हिमांशु ठाकुर, विवेक पांचाल, ऋषभ चौधरी, सुमित चौधरी, टिंकू अरोड़ा, संदीप और साहिल शामिल थे. इन आरोपियों के खिलाफ हत्या, दंगा भड़काने और डकैती के आरोप थे.
कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ अपराध में शामिल होने का पुख्ता साक्ष्य पेश करने में विफल रहा. कोर्ट ने कहा कि सिर्फ भीड़ के साथ दिखने से यह नहीं माना जा सकता कि आरोपी घर में तोड़फोड़, लूट और आगजनी करने वाली भीड़ का हिस्सा बने रहे. कोर्ट ने अभियोजन पक्ष के गवाह के बयान को अविश्वसनीय मानते हुए उसे खारिज कर दिया. अभियोजन पक्ष ने दिनेश राजपूत को चश्मदीद गवाह के तौर पर पेश किया था लेकिन गवाही के दौरान वो अपने बयान से मुकर गया.
फरवरी 2020 में हुए दंगों के दौरान 28 फरवरी को मुरसलीन नामक व्यक्ति का शव जौहरीपुर तिराहे के पास एक नाले में मिला था. इसी मामले में दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज किया था. बता दें कि फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में 53 लोग मारे गए थे और करीब 200 लोग घायल हो गए थे.
