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धरना-प्रदर्शन कर मांगों पर कार्रवाई की मांग करते हुए कर्मचारी

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मांगों पर अमल न होने से खफा अधिकारी-कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कार्मिक धरना-प्रदर्शन कर मांगों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए 27 जनवरी को देहरादून में कार्मिक महारैली निकालेंगे और इसके बाद हड़ताल करेंगे।

बुधवार को उत्तराखंड अधिकारी-कर्मचारी समन्वय मंच के बैनर तले विभिन्न संगठनों के कार्मिक परेड मैदान स्थित धरना स्थल पहुंचे। जहां उन्होंने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन में प्रदेशभर से आए कार्मिक शामिल हुए। जहां उन्होंने एक स्वर में कर्मचारियों की आठ सूत्रीय मांगों पर कार्रवाई न किए जाने पर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मंच के मुख्य संयोजक नवीन कांडपाल ने कहा कि कर्मचारियों की लगातार अनदेखी की जा रही है। सरकार के खिलाफ धरना-प्रदर्शन में मान्यता प्राप्त आठ परिसंघों ने हिस्सा लिया। उन्होंने कर्मचारियों की आठ सूत्रीय मांगों को लेकर शासनादेश जारी करने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि जल्द कोई सकारात्मक पहल न हुई तो कर्मचारी हड़ताल करेंगे।

मंच के सचिव संयोजक सुनील दत्त कोठारी ने कहा कि 27 जनवरी को सरकार के खिलाफ महारैली निकाल कर आक्रोश व्यक्त किया जाएगा। इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जाती है तो अनिश्चितकालीन हड़ताल की रणनीति बनाई जाएगी। उत्तरांचल पर्वतीय कर्मचारी शिक्षक संगठन के प्रांतीय अध्यक्ष प्रताप सिंह पंवार ने कहा कि सभी संगठन एकजुट होकर मांगों के लिए संघर्षरत हैं।

उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स संघ के पदाधिकारियों ने भी सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाया। राजकीय वाहन चालक संघ ने भी आंदोलन को पूर्ण समर्थन दिया। इस दौरान कार्मिकों ने आठ सूत्रीय मांगों का ज्ञापन भी मुख्यमंत्री को प्रेषित किया। धरने में बृजमोहन बिजल्वाण, राजेंद्र सिंह रावत, अशोक राज उनियाल, मुकेश बहुगुणा, अनिल पंवार, पूर्णानंद नौटियाल, सुधा कुकरेती, संजीव मिश्रा, प्रवेश सेमवाल, रामानंद त्रिवेद, भूपेंद्र गोयल, अनंत राम शर्मा, राजेंद्र कुमार आदि शामिल थे।

 ये हैं कार्मिकों की मांगें
  • यू-हेल्थ स्मार्ट कार्ड की सुविधा केंद्र सरकार की तर्ज पर लागू की जाए और देश के उच्च स्तरीय चिकित्सालयों को इनमें शामिल किया जाए।
  • अर्हकारी सेवा में शिथिलीकरण की पूर्ववर्ती व्यवस्था को यथावत रखा जाए।
  • प्रदेश के समस्त कार्मिकों को पूरे सेवाकाल में न्यूनतम तीन पदोन्नति या पूर्व की भांति 10, 16 और 26 वर्ष की सेवा पर पदोन्नत वेतनमान प्रदान किया जाए।
  • एक अक्टूबर 2005 से लागू अंशदायी पेंशन योजना के स्थान पर पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल की जाए।
  • वर्तमान में पदोन्नति पर लगी रोक को तत्काल हटाया जाए और पदोन्नति आदेश जारी किया जाए।
  • स्थानांतरण अधिनियम में राज्य के कार्मिकों को जिनकी सेवानिवृत्ति को एक वर्ष शेष हो अंतिम वर्ष में अनिवार्य रूप से स्थानांतरण या पदास्थापना का प्राविधान किया जाए।
  • इंदु कुमार पांडेय की अध्यक्षता में गठित वेतन विसंगति समिति की शासन को प्रेषित रिपोर्ट में कर्मचारी विरोधी निर्णयों को लागू न किया जाए।
  • विभिन्न संवर्गीय संगठनों के साथ किए गए समझौतों के अनुरूप शासनादेश जारी किया जाए।
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