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सीएम और शिक्षा मंत्री आमने-सामने, रद किया मंत्री का आदेश

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सीईओ की तैनाती पर सीएम और शिक्षा मंत्री आमने-सामने, रद किया मंत्री का आदेश

देहरादून,  मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे मुख्य शिक्षा अधिकारी (सीईओ) देहरादून की तैनाती के मामले को लेकर आमने-सामने हो गए। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे के आदेश पर देहरादून जिले के सीईओ का अतिरिक्त पदभार संभालने वाले शिक्षाधिकारी आनंद भारद्वाज को एक दिन बाद ही पद से हटना पड़ा।

इस पद से स्थानांतरित की गईं आशारानी पैन्युली के प्रत्यावेदन को निस्तारित किए बिना ही उन्हें हटाए जाने की कवायद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को नागवार गुजरी। मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद आशारानी पैन्यूली के प्रत्यावेदन का निस्तारण भी हुआ और गौचर डायट में उनका स्थानांतरण निरस्त कर उन्हें देहरादून में ही सीईओ के पद पर तैनाती के संशोधित आदेश शिक्षा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने जारी कर दिए।

दरअसल शासन ने बीती 25 जून को आदेश जारी कर सीईओ आशारानी पैन्यूली का तबादला डायट गौचर प्राचार्य पद पर किया था। आशारानी पैन्यूली ने बीते जनवरी माह में देहरादून जिले के सीईओ पदभार संभाला था। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे के आदेश पर बीते रोज एससीईआरटी में उप निदेशक आनंद भारद्वाज को मुख्य शिक्षा अधिकारी देहरादून का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया था।

शासनादेश के बाद आनंद भारद्वाज ने मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचकर आशारानी पैन्यूली को रिलीव कर एकतरफा कार्यभार ग्रहण कर लिया था। आशारानी पैन्यूली ने सीईओ कार्यालय पहुंचकर खुद को एकतरफा रिलीव किए जाने पर आपत्ति करते हुए विरोध जताया था।

आशारानी पैन्यूली का कहना है कि गौचर डायट में अपने तबादले पर आपत्ति जताते हुए शासन को प्रत्यावेदन दिया था। उनका तर्क है कि सुगम से दुर्गम में अनिवार्य श्रेणी में 10 फीसद तबादला आदेश की जद में वह नहीं आतीं।

कुल 11 विभागीय अधिकारियों में से 10 फीसद के हिसाब से 1.1 अधिकारी ही तबादले के पात्र हैं। शासन की इस व्यवस्था की जद में आए एक शिक्षाधिकारी का तबादला दुर्गम में किया जा चुका है। वह तबादले की जद से बाहर हैं। ऐसे में महज छह माह बाद ही किए गए तबादले के खिलाफ उन्होंने प्रत्यावेदन दिया था।

उक्त मामले में दोनों अधिकारियों के बीच विवाद बढऩे पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हस्तक्षेप किया। इसके बाद मुख्य सचिव के निर्देश पर उनके प्रत्यावेदन का निस्तारण कर बीती शाम ही गौचर किए गए उनके तबादले को निरस्त कर देहरादून में उनकी तैनाती यथावत रखी गई।

वहीं उप शिक्षा निदेशक आनंद भारद्वाज को दिए अतिरिक्त कार्यभार से मुक्त किया गया। विद्यालयी शिक्षा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने उक्त संबंध में संशोधित आदेश जारी किए। उक्त संशोधित आदेश गुरुवार को मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचा।

आदेश मिलने पर कार्यवाहक सीईओ आनंद भारद्वाज अपना कार्यभार वहां मौजूद जिला शिक्षा अधिकारी को सौंपकर चले गए। संपर्क करने पर आनंद भारद्वाज ने कहा कि शासन के आदेश पर उन्होंने उक्त अतिरिक्त कार्यभार संभाला था। संशोधित आदेश मिलने पर अतिरिक्त कार्यभार छोड़ दिया। वहीं शिक्षा मंत्री बीते रोज से ही पारिवारिक कार्य के चलते राज्य से बाहर हैं। उनके सोमवार तक लौटने की संभावना है।

तबादलों की जांच समिति को और दस दिन की मोहलत

प्रदेश में शिक्षकों के तबादला आदेश संबंधी आपत्तियों और नियमों के मुताबिक तबादले नहीं होने की जांच कर रही समिति को शासन ने और मोहलत दी है। तकरीबन चार हजार शिक्षकों के मामलों के परीक्षण को गठित जांच समिति को रिपोर्ट देने के लिए अतिरिक्त दस दिन दिए गए हैं। इसके साथ ही स्थगित किए गए तबादलों के बारे में भी अब फैसला इस माह के आखिर तक ही संभव होगा।

प्रदेश में तबादलों के पात्र शिक्षकों में से महज दस फीसद के तबादलों में भी कई विसंगतियां सामने आ गई थीं। इसे देखते हुए सरकार ने तबादला आदेश के दस दिन के भीतर ही विसंगतियों से परेशान शिक्षकों को राहत दी थी। शासन ने बीती तीन जुलाई को आदेश जारी कर दुर्गम में ही रहने के इच्छुक शिक्षकों के सुगम में तबादले और एकल शिक्षक वाले विद्यालयों से प्रतिस्थानी की व्यवस्था के बगैर ही शिक्षकों के तबादले स्थगित कर दिए थे।

साथ में तबादला आदेशों से संबंधी आपत्तियों के निस्तारण और नियमों के मुताबिक तबादलों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई थी। समिति को दस दिन के भीतर अनिवार्य रूप से रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए थे।

महकमे में जिलों से लेकर प्रदेश स्तर पर किए गए कुल करीब चार हजार शिक्षकों के तबादलों की जांच में समिति को वक्त लग रहा है। इसे देखते हुए समिति की ओर से जांच के लिए और समय मांगा है। शिक्षा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि समिति को जांच के लिए और दस दिन दिए गए हैं। इस माह के अंतिम हफ्ते में समिति अपनी जांच रिपोर्ट शासन को सौंपेगी। इसके बाद ही तबादलों के संबंध में अंतिम निर्णय लिया जाएगा। समिति को मोहलत मिलने के साथ ही स्थगित किए गए तबादलों पर फैसला भी अब देरी से होगा।

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