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विद्यालयों के वातावरण में प्रदूषण की इंडोर क्वाल्टी पर ऑल स्कूल पेरेन्ट्स एशोशियशन ने किया गोष्टि का आयोजन

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ल स्कूल पेरेन्ट्स एशोशियशन ने महागुन मेंशन सोसायटी में एज्यूकेशनल प्रोग्राम ऑन इंडोर क्वाल्टी कार्यक्रम का आयोजन किया जिसमें क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की प्रमुख वैज्ञानिक अधिकारी, नलिन सिंघल वातनुकलन सलाहकार, डाक्टर अमित त्यागी नाक कान गला रोग विशेषज्ञ,डाक्टर संजय भास्कर फिज्योथ्रेपिस्ट, डाक्टर निक्की त्यागी फिज्योथ्रेपिस्ट,व स्थानीय पार्षद अभिनव जैन ने अपने विचार रखे।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए सपना श्रीवास्तव ने कहा कि इंडोर क्वाल्टी तभी अच्छी होगी जबकि हमारी बाहर की क्वाल्टी अच्छी होगी अक्सर सड़को पर पड़े मलवा,गंदा पानी पड़ा रहता है।जोकि अंदर की क्वाल्टी को गंदा करता है।घरों के बाहर पानी का छिड़काव करना चाहिए जिससे कि धूल ना उड़े ओर बाबर के साथ साथ इंडोर क्वाल्टी बेहतर बनी रहे,उन्होंने कहा कि हम स्कूलों की ऑडिट रिपोर्ट मनवाएँगे।
वातनुकलन सलाहकार निलिन सिंघल ने कहा कि बच्चे स्कूल में सात से आठ घन्टे रहते है।प्रदूषित वातावरण का से इंडोर क्वाल्टी ज्यादा प्रदूषित हो जाती है।जो भी भवन सेंट्रलाइज है।उनमें इलेक्ट्रॉनिक एयर फिल्टर लगने चाहिए तथा साल में एक बार डक की सफाई जरूर होनी चाहिए।उन्होंने बताया कि इंडोर वतावरण के लिए भारत मे कोई मानक नही है।इस पर सरकार को काम करना चाहिए तथा वर्तमान में जो अंतरराष्ट्रीय मानक है।उन्हें लागू कराने की व्यवस्थता सरकारी स्तर से होनी चाहिए।
नाक,कान,गला रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अमित त्यागी ने कहा कि प्रदूषित वातावरण से बच्चों को नाक बहना,गले मे दर्द जुखाम आदि की बीमारी होने लगती है।पेरेन्ट्स अक्सर बच्चों को डाक्टर के पास लेकर भागते है।जोकि बच्चों को तत्काल आराम के लिए एंटीबायोटिक दवाएं देते है।जोकि आगे चलकर बच्चों के स्वास्थ्य को ओर खराब करती है।जब तक हो सके पेरेन्ट्स एंटीबायोटिक दवाओं से बचकर बच्चे को सुबह स्वच्छ हवा में घुमाए,जिन कमरों में ऐसी लगे है।उन्हें थोड़ी देर के लिए खुला जरूर रखे जिससे कि बाहर की साफ हवा कमरों में आये।
बच्चों में स्कूली बैग के विषय मे फिज्योथ्रेपिस्ट डाक्टर निक्की त्यागी ने सलाह दी कि बच्चों का स्कूली बैग केवल कमर तक होना चाहिए,बैग को कुछ इस तरह तैयार किया जाए कि बड़ी क़िताब,फाईल नीचे की साईड लगे जोकि कमर से सटी रहे तथा उसके बाद छोटी किताबे बैग में लगाई जाए,बैग को एक ओर लगाने के बजाए पूरा फैलाकर लगाया जाए सिंगल स्टेप के बदले दोनों कंधों पर गए तथा कोशिश करे कि स्कूली बैग में नीचे की तरफ भी स्टेप लगाया जाए जोकि कमर पर बांधा जा सके।
फिज्योथ्रेपिस्ट डाक्टर संजय भास्कर ने बताया कि बच्चों को बचपन से ही खेल खेल में एक्सजसाईज कराने की आदत डालें छोटे पन से ही बच्चों को लटकाना,खेलना आदि पर ध्यान दे,बच्चा अगर स्कूली बैग लेकर नीचे को झुक कर चलता है तो उसे शुरआत में ही रोके अन्यथा ये अगके चलकर बीमारी का कारण बन सकता है।
पार्षद अभिनव जैन ने कहा की जल्दी सोना,जल्दी उठना आज के दौर में पुरानी बातें हो गयी है।आज बच्चों के खेलने के लिए पार्क नही है।अब इसी व्यवस्थता में बच्चों के स्वाथ को ठीक रखना वास्तव में बड़ी चुनोती है।व्याम,एक्सरसाइज पर ज्यादा से ज्यादा ध्यान देना चाहिए।
ऑल स्कूल पेरेन्ट्स एशोशियशन की अध्यक्ष शिवानी जैन ने कहा कि आये दिन बच्चों को बीमार देख मन मे अक्सर सवाल आते थे कि आखिर बच्चे इतनी जल्दी जल्दी बीमार क्यो पड़ते है।करीब एक साल तक कई स्कूलो का सर्वे,स्कूली बच्चों से मिलने पर इस नतीजे पर पहुचे की शायद स्कूल की इंडोर क्वाल्टी अच्छी न होने के कारण बच्चे बार बार बीमार पड़ते है।इसी कड़ी में पेरेन्ट्स को जागरूक करने के लिए आज के कार्यक्रम का आयोजन किया गया।उन्होंने कहा कि जल्द ही एक प्रतिनिधि मंडल प्रदूषण विभाग के अधिकारियों से मिलकर इंडोर क्वाल्टी की जाँच की मांग करेगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता आरडब्ल्यूए अध्यक्ष गौरव मित्तल व संचालन एशोशियशन के महासचिव सचिन सोनी ने किया।कार्यक्रम में उपाध्यक्ष रविन्द्र रावत,मोहित सिंघल,मनीषा कैन,निधि दत्ता,सपना गर्ग,शील शर्मा,उमेश सारस्वत,राजीव त्यागी,राहुल जैन,प्रेम पाल आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे।

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