दोष और क्षमा का मनोविज्ञान

Want create site? Find Free WordPress Themes and plugins.

 

गलती करना इंसान की फितरत है बड़े से बड़े व्यक्ति, छोटे से छोटा व्यक्ति, समझदार से समझदार व्यक्ति भी गलती कर सकता है। गलती को क्षमा करना बड़प्पन का प्रतीक है, लेकिन अपनी गलती को स्वीकार कर लेने के लिए बड़प्पन, साहस और समझ तीनों चाहिये। कहते है अगर व्यक्ति को उसकी गलती को सही से समझा दिया जाये और उसे सही वातावरण उपलब्ध कराया जाये तो उसके सुधरने की संभावना ज्यादातर रहती है। प्रसिद्ध विचारक जार्ज सातायना ने कहा था ‘‘इतिहास अपने आप को दोहराता है जो लोग अतीत से सबक न ही लेते उन्हें इतिहास का पुर्नरावृत्ति झेलनी पड़ती है।’’ कुल मिलाकर हमे गलती से सीखकर उसे पुनः न दोहराने की कोशिश करनी चाहिए। चाणक्य ने चन्द्रगुप्त से कहा ‘‘गलती करने में कोई दोष नहीं पर गलती हर बार नयी होनी चाहिए’’ अगर हम गलती को दोहरा रहे है तो इसका मतलब ये ही है कि हमने उससे कुछ सीखा नहीं है। गलती को जब बार-बार दोहराया जाता है तब यह आदत बन जाती है और जब गलत आदत बार-बार दोहराई जाती है तब ये संस्कार बन जाती है और सबसे यह व्यक्ति स्वयं हो अथवा कोई और लड़ा जा सकता है पर संस्कार से नहीं, तो सामने वाले व्यक्ति की किसी भी गलती से हमे ये समझने की क्षमता होनी चाहिये कि वह गलती कर रहा है या उसकी आदत ऐसा करने की है अथवा अपने संस्कार के कारण वह ऐसा करने के लिये मजबूर है। मनोवैज्ञानिक मानते है जब हम कोई गलत काम पहली बार करते है तो हम उसे करते हुए असहजता महसूस करते हैं जब उसे दूसरी बार करते है तब असहजता कम होती है जितनी बार-बार उसे दोहराते है हम उसे करने के इतना आदि हो जाते है कि हम उसमे कुछ कमी ही प्रतीक नहीं होती है।
जब छोटे गलती करते है तो बड़े उसे निभाते है और जब बड़े गलती करते है तो छोटे उसे झेलते है। झेलना, निभाने से ज्यादा कठिन है। अगर ईश्वर ने आपको धन, ज्ञान, शक्ति, संख्या, सामाजिक, क्षमता से बड़ा बनाया है तो आपकी जिम्मेदारी भी बड़ी है।
ये कतई भी संभव नहीं है कि कोई गलती करे ही ना तब ये ही समाधान बनता है सहजता, समझदारी में बड़प्पन के साथ आपसी संबंधों को निभाये जाये।

सतेन्द्र यादव विचारक व समाजसेवी

Did you find apk for android? You can find new Free Android Games and apps.

About The Author

हर ख़बर पर पैनी नज़र

Related posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *