Breaking News

क्या विकासशील राष्ट्र का आधार बनेगी उदासीन शिक्षानीति!

Want create site? Find Free WordPress Themes and plugins.

क्या शिक्षा हर बच्चे का मौलिक अधिकार है?
क्या भावी भविष्य की नींव के लिये विकासशील राष्ट्र का खाका तैयार है?
जो दावे किए जाते हैं, क्या जमीनी हकीकत वाकई वही है? ये सब मौलिक और विचारणीय प्रश्न हैं।
आज शिक्षा अधिकार कानून 2009 को लेकर बड़ी बहस उठी है। वास्तव में यह कानून देश के हर बालक को सुशिक्षित बनाने की मंशा से लागू किया गया था।
ध्यान देने वाली बात यह है कि ये कानून सिर्फ आठवीं तक की शिक्षा का अधिकार देता है। आठवी तक की पढ़ाई से न तो उच्च शिक्षा और नही कोई नोकरी मिल सकती है। हां साक्षर मजदूर तो बन सकते हैं। साक्षर तो बना सकते हैं शिक्षित नहीं कर सकते। देश किस दिशा मे आगे बढ़ रहा है। बुद्धिजीवियों को राष्ट्र की इस अमूल्य धरोहर को बचाये रखने के लिये ठोस कदम उठाने होंगे।
वरना सरकारो की आज की शिक्षा के प्रति उदाशीनता ही देश के इस निम्न वर्ग की ओर ध्यान ना देने के कारण सिर्फ इस वर्ग से मजदूरों की तादात बढ़ती जाएगी। इनका मानसिक और बौद्धिक स्तर देश मे अशांति का वातावरण ही तैयार करेगा। क्योंकि आज का ये कच्चा घड़ा कल देश का भविष्य होगा।
आठवीं से आगे की शिक्षा केवल उनके लिये है जिनके पास शिक्षा खरीदने का पैसा व साधन हो। स्वाभाविक है 77 प्रतिशत जनता जो 20 रुपये प्रतिदिन की आय पर गुजारा चलाती है उनके लिये शिक्षा के दरवाजे बंद ही रहेंगे। यह कानून शिक्षा पर पूरा प्रभाव केंद्रीकृत नौकरशाही के दायरे को जस का तस बनाए रखता है।
शिक्षा का अधिकार इस देश की संवैधानिक व्यवस्था द्वारा प्रदान किया गया मूलभूत अधिकार है। यह किसी को मिली खैरात नहीं।
कुछ नहीं से कुछ भला क्या केवल उस निम्न श्रेणी के लिये ही है जो लगातार मानसिक यातनाओं से गुजरते हुए भेदभाव और नजरअंदाजी का शिकार है। बाकि वर्ग तो अपने बच्चो के लिये महंगे स्कूल और शिक्षा खरीद ही लेंगे।
जहाँ तक निम्न वर्ग के बालिकाओं, बालको का सवाल है तो उनके लिये सर खपाने की जरूरत नहीं। आज तक तो उनका काम लोकतंत्र की जूठन से ही चल रहा है वैसे ही आगे भी चलता रहेगा इस आजाद भारत में।
आओ मिलकर अपना दायित्व निभाये
समाज के इस वर्ग को शिक्षित बनाये
ज्योति से ज्योति जगाते चलो
साक्षरता की ज्योति जलाते चलो
हम क्या बेहतर दे सकते हैं इस पर विचार कर जागरुकता लायें। इससे सरकारें भी बाध्य होंगी।

Did you find apk for android? You can find new Free Android Games and apps.

About The Author

हर ख़बर पर पैनी नज़र

Related posts

2 Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *